Grey Market Premium क्या होता है, Kostak Rate और Subject to Sauda (SS) कैसे पता करे ?

IPO Kostak Rate & Subject to Sauda

Grey Market Premium क्या होता है? कई लोगो के मन में ये ही सवाल होता है, आज हम जानेगे Grey Market Premium, Kostak Rate और Subject to Sauda क्या होता है और कैसे लोग IPO से बड़ी कमाई करते है

नमस्कार स्वागत है, आजकल शेयर बाजार में शेयर खरीद बिक्री से अधिक IPO (INITIAL PUBLIC OFFERING) का क्रेज काफी बढ़ा है. ज्यादातर रिटेल्स इन्वेस्टर यानी कि नौकरी पैशा लोग भी IPO में निवेश करते है।

IPO भरने से पहले हर व्यक्ति Grey Market Premium के बारे में जानकारी लेता है। अलग अलग वेबसाइट पर आईपीओ के ग्रे मार्केट प्रीमियम की जानकारी मिलती है. लेकिन क्या आपको पता है कि ग्रे मार्केट प्रीमियम का मतलब क्या है ? क्या ये रेट हमेशा सही होते है और ये रेट कौन डिसाइड करता है? इन सभी सवालों के जवाब आपको इस वीडियो में मिल जायेंगे।

देखिए दुनिया में किसी भी तरह के दो मार्केट होते है एक व्हाइट और दूसरा ब्लैक. जैसे लॉकडॉन के समय में शराब, गुटका जैसी चीजों की सप्लाई बंद हो गई थी, तो जिनके पास ऐसी चीज़ों का स्टॉक मौजूद रहा था, उन्होंने ऊंचे दाम पर इनको बेचना शुरू कर दिया था।

जोकि एक तरह का ब्लैक मार्केट बन गया। कुछ दवाओं के पर पाबंदी होती है लेकिन ब्लैक मार्केट से ऊंचे दाम में बेची जाती है। लेकिन ग्रे मार्किट पूरी तरह से ब्लैक नही,होता बल्कि व्हाइट और ब्लैक के बीच का मार्केट होता है। इसलिए उसको ग्रे मार्केट कहते है।

कंपनी शेयर बाजार में लिस्ट होने के बाद उसके उपर SEBI का कंट्रोल शुरू हो जाता है, लेकिन जबतक कंपनी लिस्ट नही होती, तब तक सेबी के कंट्रोल मे नही होता. इसलिए सौदा बाजार में डिमांड के हिसाब से भाव बढ़ता और घटता है

ग्रे मार्केट प्रीमियम कैसे तय होता है। (How grey market premium is calculated)

Grey Market में एक बेचने वाला होता है और एक खरीदने वाला. इन दोनों के पास अभी शेयर नही है लेकिन सौदा शुरू हो जाता है । इन दोनों के बीच एक ब्रोकर होता है जोकि दोनों के Demat account को मैनेज करता है। खरीदने और बेचने वाले एक दूसरे को नही जानते, लेकिन ब्रोकर उनके बीच चैन का काम करता हैं।

मान लेते है, कि किसी कंपनी ने आईपीओ लाने के लिए ₹1000 के रेट पर 15 शेयर ऑफर किए है। मतलब ₹15000 का एक लोट. खरीदने वाले को मार्केट रिसर्च से पता चलता है, कि इस कंपनी के आईपीओ से 50% लिस्टिंग गेन मिल सकता है यानी कि एक शेयर से ₹500. अब वह 1200 बेचने वाले को ऑफर करता है तो 200 GMP हुआ।

1000 *15 लोट साइज
200 बेचने वाले को दिया GMP

1200 per share buying cost
300 लिसिटिन गैन

लिस्टिंग प्राइस 1500 – 1200 बायिंग कॉस्ट= 300 *15 = 4500 per lot प्रॉफिट हुआ।

इसके उल्टा यदि ये बाइंग कॉस्ट 1200 से कम में लिस्ट होता है तो फाइनल सेटोमेंट अमाउंट बायर सेलर को देता है। और एक्सपेक्टेशन से ज्यादा प्रॉफिट होता है, तो सेलर को वो प्रॉफिट बायर को देना होता है. और ये सब ब्रोकर के द्वारा होता है। कहने का मतलब सेलर अपनी एप्लीकेशन को एक निश्चित भाव में बेच देता हैं। फिर उससे जो भी फायदा नुकसान होगा तो बायर को मिलता है।

कोस्टक रेट क्या है ? (What is Kostak Rate)

Kostak Rate में लोट के हिसाब से डील होती है, यानी कि जो खरीदने वाला होता है वो सीधा बायर को एक लॉट का फिक्स रेट ऑफर कर देता है। जैसे कि बायर एप्लीकेशन के बदले में ₹500 सेलर को देता है फिर चाहे आईपीओ लगे या ना लगे सेलर को फिक्स रेट दिया जाता है।

ऐसा करके जो बायर है वो कई लोगो की एप्लीकेशन (फॉर्म) खरीद लेता है। ये एक तरह की संभावना पर खेला जाता है। जिसने अपनी एप्लीकेशन (फॉर्म) बेचा है उसको यदि शेयर लगते है तो उसका प्रॉफिट या लॉस सीधा बायर में ट्रांसफर किए जाते है। लेकिन ये सब के बीच ब्रोकर होता है जो इन चीजों को मेक sure करने का काम करते है कि बायर का मुनाफा या नुकसान उसे ट्रांफर हो जाए।

सब्जेक्ट टू सौदा क्या है ? (What is Subject to Sauda?)

सब्जेक्ट टू सौदा भी लॉट साइज में होता है जिसमे बायर सेलर की एप्लीकेशन को खरीदता है। लेकिन उसमे शर्त यह होती है, कि सौदा होगा तो ही पैसे सेलर को दिए जायेंगे। यानि कि जो बायर है, उसकी एप्लीकेशन लग जाती है तो ही उसको निश्चित रकम दी जाएगी।

Subject to Sauda में बायर को ये फायदा रहता है कि जितनी एप्लिकेशन लगती है उसी की निश्चित रकम चुकानी होती है। एप्लिकेशन लगने के बाद उसमे जो भी फायदा नुकसान होता है वह बायर को मिलता है और ये सब ट्रांसकेशन की जिम्मेदारी ब्रोकर की रहती है।

दोस्तो इन तीनों ट्रांसकेशन में बायर और सेलर के बीच कोई लिखित एग्रीमेंट नही होता है ये अनरेगुलेटेड मार्केट है. यहां सब वर्बली होता है। अगर बायर या सेलर ने अपने transcation ऑनर करने से मना कर दिया तो कोई किसी का कुछ बिगाड़ नही सकता। यहां तक भी बायर सेलर एक दूसरे पर कानूनी कार्यवाई या सेबी में कार्यवाई नही कर सकते है। ये विश्वास पर चलता है।

Grey Market Premium के प्राइस की कोई रिलाइलबिलिटी नही होती है। जरूरी नही कि आईपीओ का प्रीमियम बताया जा रहा है, उतना ही रिटर्न आपको मिले। इसलिए अलग अलग वेबसाइट पर जो ग्रे मार्केट प्रीमियम बताया जा रहा है उससे कम या ज्यादा में भी शेयर की लिस्टिन हो सकती है।

क्या Grey Market Premium से निवेश करना चाइये (is grey market premium accurate)

तो फिर ग्रे मार्केट प्रीमियम पर लोग विश्वास क्यों करते है क्या ये रिलायबल है? जी हां ग्रे मार्केट प्रीमियम से डीलर ke द्वारा जो बताया जा रहा है वह सोशल मीडिया, न्यूज, वेबसाइट के जरिए लोगों को पता चलता है जिससे एक बड़ा हाइप बनता है और लोग ग्रे मार्किट देखकर ज्यादा से ज्यादा एप्लिकेशन भरते है और इसी वजह से ये पॉजिटिव लिस्टिंग का इंडिकेशन बन जाता है।

शेयर मार्केट से बनेगे करोड़पति बस मत करना ये 10 गलतियों – Stock Market Tips in Hindi Stock Market Tips: शेयर मार्केट से करोड़पति कैसे बनें? Share Market Tips in Hindi Chhath Puja 2023 छठ पूजा की पौराणिक कथा, श्री राम और द्रौपदी ने रखा था व्रत Chhath Puja 2023 : छठ पूजा का शुभ मुहूर्त, 4 दिवसीय छठ पर्व, खरना, डूबते सूर्य को अर्घ्‍य, उगते सूर्य को अर्घ्‍य, छठ पूजा का महत्व ट्रेन हादसा: न्यू दिल्ली दरभंगा में लगी आग, धुआं धुआं हुई बोगियां