ग्यारस कब है December 2023 ? जानिए इस महीने की ग्यारस, – इस महीने की एकादशी

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ग्यारस कब है December 2023 ? कई भारतीय लोग यही सवाल करते हैं कि ग्यारस कब है जिसे एकादशी भी कहा जाता है आज हम जानने वाले हैं कि दिसंबर 2023 में ग्यारस कब आ रही है भारतीय त्योहार और व्रत में सबसे प्रसिद्ध ग्यारस को माना जाता है ग्यारस का दिन काफी महत्वपूर्ण होता है 

भारतीय हिन्दू पंचांग में विशेष महत्व रखने वाले तिथियों में से एक है ‘ग्यारस’. यह तिथि हर मास में दो बार आती है और दिसंबर 2023 में इसका आगाज़ होने वाला है। जान लेते हैं कि दिसंबर 2023 में कौन सी तारीख को एकादशी है

ग्यारस कब है December 2023

8 दिसंबर 2023, शुक्रवार : उत्पन्ना एकादशी 

भारतीय संस्कृति में व्रतों का विशेष स्थान है, जो मानव जीवन को आद्यांत से लेकर आध्यात्मिक उन्नति की ओर प्रेरित करते हैं। व्रतों का एक विशेष महत्व उत्पन्ना एकादशी को दिया जाता है, जो धार्मिकता, भक्ति, और सामर्थ्य का संगम है।

उत्पन्ना एकादशी की विशेषता:

  • आदित्य से मिलता है आशीर्वाद:
    • उत्पन्ना एकादशी को भारतीय परंपरा में विशेष महत्व दिया जाता है, क्योंकि इस दिन भगवान विष्णु की उत्पत्ति हुई थी। इसलिए इसे ‘उत्पन्ना एकादशी’ कहा जाता है, जिसका अर्थ होता है “उत्पत्ति“।
    • इस दिन धार्मिक आत्मा को अपने मूल आदि से जोड़ने का एक अद्वितीय अवसर होता है, जिससे आत्मा को आदित्य भगवान की आशीर्वाद मिलता है।
  • उत्पन्ना एकादशी की व्रत विधि:
    • उत्पन्ना एकादशी का व्रत विधिपूर्वक अवश्य करें। इस दिन व्रती व्यक्ति को नींद न आने वाली रात्रि में जागरूक रहना चाहिए और भगवान विष्णु की पूजा करनी चाहिए।
    • विशेष रूप से तुलसी के पत्ते, फल, और पुष्पों से भगवान की पूजा करना शुभ माना जाता है।
    • व्रती व्यक्ति को अच्छे कर्मों का पालन करना चाहिए और अन्यों की मदद करना शिक्षित किया जाता है।
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उत्पन्ना एकादशी की व्रत कथा:

उत्पन्ना एकादशी की कथा भगवान श्रीकृष्ण और राजा मंदाता के बीच हुई एक रोचक घटना पर आधारित है:

कई सावन पर्वों के बाद, राजा मंदाता और रानी शीला को संतान सुख प्राप्त नहीं हो रहा था। इस पर राजा और रानी ने विष्णु भगवान की आराधना शुरू की। एक दिन, उन्होंने सभी नारियों के साथ अन्न, वस्त्र, और धन के रूप में यथाशक्ति दान करने का निर्णय लिया।

इस अद्वितीय कर्म के फलस्वरूप, राजा और रानी को एक सुन्दर और अमृत से भरा हुआ पुत्र प्राप्त

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22 दिसंबर 2023, शुक्रवार : मोक्षदा एकादशी

मोक्षदा एकादशी, हिन्दू पंचांग के अनुसार, एक पवित्र तिथि है जो व्रती भक्तों को आत्मिक सुधार और मोक्ष की प्राप्ति की ओर बढ़ने का अद्भूत अवसर प्रदान करती है। इस एकादशी का व्रत आत्मा की मुक्ति की ओर एक महत्वपूर्ण कदम है, और इसे ‘मोक्षदा’ एकादशी कहा जाता है।

मोक्षदा एकादशी का महत्व:
मोक्षदा एकादशी का महत्व अत्यधिक है, क्योंकि इस दिन भगवान विष्णु ने राजा विक्रमादित्य को आत्मा की मुक्ति की वरदान दी थी। इसे विशेष रूप से धर्मिक ग्रंथों में ‘गीतोपदेश’ के अनुसार महत्वपूर्ण माना जाता है, जहां भगवान कृष्ण ने आत्मा के मुक्ति के मार्ग की महत्वपूर्ण बातें सिखाई थीं।

मोक्षदा एकादशी व्रत विधि:

  • उपवास (व्रत):
    • व्रती व्यक्ति को इस दिन निरंतर उपवास करना चाहिए। आहार में सात्विक आहार जैसे फल, सब्जियां, और दूध का उपयोग करें।
  • भगवान विष्णु की पूजा:
    • मोक्षदा एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। उपास्य रूप में तुलसी वृक्ष की पूजा भी करें।
  • विष्णु सहस्त्रनाम पाठ:
    • भगवान विष्णु के सहस्त्रनाम का पाठ करना, विशेष रूप से ‘विष्णु सहस्त्रनाम’ का, आत्मा को शुद्धि देने में मदद करता है।

मोक्षदा एकादशी कथा:

एक बार की बात है, राजा विक्रमादित्य नामक एक धर्मिक राजा अपनी पत्नी दीपावली के साथ धर्मिक कर्तव्यों का पालन करते थे, लेकिन उनकी पत्नी की अकाम्पन की बजह से वह व्रती नहीं थे। एक दिन दीपावली की गलती से एक शिवलिंग पर जल दे ती हैं जिससे उनकी पुरानी सारी पुण्यकर्मों की शिकार शापित हो जाती है।

इसके बाद वह अपनी पत्नी के साथ बहुत जीवन जीने के लिए विचार करते हैं और एक साधु से मिलते हैं। साधु की सीख के बाद वह एक बार फिर से व्रती बन जाते हैं और मोक्षदा एकादशी का व्रत धारण करते हैं। इसके बाद, उन्हें भगवान विष्णु ने आत्मा की मुक्ति की वरदान दिया और उन्हें अपनी पुरानी प्राप्तियों का शाप भी मिटा दिया।

ग्यारस, जो कि हिन्दी कैलेंडर के अनुसार ‘एकादशी’ कहलाती है, यह तिथि बड़े आध्यात्मिक और धार्मिक महत्व की होती है और विभिन्न क्षेत्रों में लोग इसे विशेष आदर और उत्साह के साथ मनाते हैं।

ग्यारस का महत्व:

  • ग्यारस का आचरण हिन्दू धर्म में विशेष महत्वपूर्ण है। इसे भगवान विष्णु की एक विशेष पूजा के रूप में माना जाता है, जिसे वामन एकादशी भी कहा जाता है।
  • इस दिन लोग विशेष रूप से व्रत रखते हैं और भगवान विष्णु की पूजा करते हैं। यह मन, वचन, और क्रिया से संपूर्ण भक्ति और श्रद्धा का अद्भूत त्योहार है।
  • व्रत की कथा:ग्यारस के दिन की कथा में विष्णु भगवान के वामन अवतार की महत्वपूर्ण कथा सुनाई जाती है, जिससे इस दिन का धार्मिक महत्व और बढ़ता है।
  • आचार्य सेवा कई स्थानों पर ग्यारस के दिन आचार्यों की सेवा और दान का कार्यक्रम होता है। लोग इस मौके पर आचार्यों को समर्थन और आदर्श्य पुरुषों के रूप में देखते हैं।
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