चीन के 1 अरब डॉलर निवेश को सीधा मुंह पर ना बोल दिया मोदी सरकार ने ! Byd India

Modi government did not speak directly to China's $ 1 billion investment

सीमा पर अपनी ताकत का गलत इस्तमाल करने वाला चीन अब घुटने टेकने लगा है। चीन की अर्थव्यवस्था सुस्त होती हुई दिख रही है चीन का एक्सपोर्ट गिर रहा है। कोविड के बाद से चीन ने बाहरी देशों से अपने रिश्ते तो खराब किए ही, साथ ही घरेलू कंपनियों पर भी दबाव बनाया ! अलीबाबा जैसी टेक कंपनियों को धमकियां दी जिससे की कोई भी कंपनी चीन में अपना दब दबा ना बना सके!

भारत ने चीन का ऑफर ठुकराया
चीन की कम्युनिस्ट पार्टी की वजह से कोई भी देश उनके साथ बिजनेस करने को तैयार नही. बता दे कि चीन की इलेक्ट्रिक कार निर्माता कंपनी BYD भारत में अपना प्लांट लगाना चाहती थी और इसके लिए हैदराबाद मेघा इंजीनियरिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के साथ समझौता करके भारत में 1 अरब डॉलर का निवेश प्रताव रखा गया था. हालाकि मोदी सरकार ने चीन के इस ऑफर को ठुकरा दिया।

क्या था BYD का मेगा प्लान –
किसी भी विदेशी कंपनी को भारत में निवेश करने के लिए लोकल कंपनी से साझेदारी करनी होती है जिसमें सरकार भी मुख्य रोल अदा करती है। इलेक्ट्रिक वाहन निर्माता चीनी कंपनी BYD ने प्रस्ताव रखा था कि वह भारत में 10 से 15 हजार इलेक्ट्रॉनिक कारों का मैन्युफैक्चरिंग करेगी । बता दें कि इस कंपनी के दो इलेक्ट्रॉनिक मॉडल भारत में पहले ही लॉन्च हो चुके हैं।

क्यों ठुकरा दिया 1 अरब डॉलर का निवेश?
2020 में चीन ने बॉर्डर पर भारत की नाक में दम करके रखा था. वह अलग अलग तरीकों से भारत चीन सीमा का उलंघन कर रहा था। चीन की इन हरकतों के चलते भारत ने उसके खिलाफ कई एक्शन भी लिए. चीन के कई प्रोडक्ट्स पर ड्यूटी बढ़ा दी गई, कई चीन ऐप्स बैन कर दिए जैसे टिकटॉक इत्यादि!

BYD की डील को खारिज करने के पीछे का कारण सुरक्षा को बताया गया है. दरअसल सरकार को डर है कि चीन की वजह से भारतीय इलेक्ट्रिक निर्माता कंपनियों पर इसका असर पड़ेगा। चीन के लिए भारत बड़ा मार्केट है। लेकिन मोदी सरकार चीनी प्रोडक्ट्स से दरकिनार करना चाहती है।

बेरोजगारी से परेशान है चीन –
COVID के बाद से चीन में भयंकर बेरोजगारी का खतरा मंडरा रहा है चीन में युवा बेरोगारी दिनों दिन बढ़ती हुई 45% तक पहुंच चुकी है। वैसे तो चीन अपने सही आंकड़े कभी दुनिया के सामने पेश नही करता है लेकिन इस समय चीन की हालत काफी सुस्त है। वह अपनी ताकत का भी इस्तेमाल नही कर सकता.

भारत से दुश्मनी महंगी पड़ी –
चीन ने खुद भारत से दुश्मनी मोल ले ली, जब सीमा पार वह युद्ध अभ्यास कर रहा था, तभी भारत ने उसकी दुक्ति नश को पकड़ लिया. आज चीन के घेरेलू बाजार में कंपनियां चाहकर भी विदेशों में अपना निवेश नही कर पा रही है।

सस्ती इलेक्ट्रिक कार बनाने में होशियार चीन –
सस्ते दाम पर इलेक्ट्रिक कारों का निर्माण भविष्य की मांग है। चीन को इलेक्ट्रिक कारों की बैटरी बनाने में महारत हासिल है, हालाकि सब कुछ होते हुए भी चीन के साथ ज्यादातर देश बिजनेस करने के इच्छुक नही है। यूरोप में भी सरकार इलेक्ट्रिक कार के निर्माण में चीन का दबदबा खतम करने के लिए एक बिल लेकर आई है जिससे वहा से भी चीन को निराशा हाथ लग रही है।

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