Rishi Sunak Wife Akshata Murthy के नेकलेस ने मचाई धूम, भगवान विष्णु का प्रतीक, जानिए 10 खास बातें

Akshata murthy Gandaberunda

Rishi Sunak Wife Akshata Murthy : भारतीय किसी भी देश में चले जाएं अपनी संस्कृति और अपने धर्म को कभी भूल नहीं सकते इसका साफ उदाहरण ब्रिटिश के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक है, जो हर बार भारतीय संस्कृति को बढ़ावा देते है

इस बार ब्रिटिश प्रधानमंत्री की धर्मपत्नी अक्षता मूर्ति ने दो सिर वाले इस पक्षी का जो हार पहना हुआ है उसकी चारों ओर जोरो सोरो से चर्चा हो रही है, तो चलिए जान लेते हैं आखिर क्या है इस दो सर वाले पक्षी में जो इसे सबसे खास बनाता है 

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पौराणिक कथाओं में दो सिर वाले पक्षी गंडाबेरुंडा या भेरुंडा (Gandaberunda) का जिक्र आता है और इसे भगवान विष्णु का एक रूप माना जाता है।

ब्रिटिश प्रधानमंत्री ऋषि सुनक की पत्नी अक्षता मूर्ति ने दिवाली के मौके पर ऐसे वस्त्र और आभूषण पहने थे, जिससे उन्होंने भारतीय लोगों को प्रभावित किया। उनकी चयन की गई पहनावे ने लोगों के दिलों को छू लिया है। उन्होंने इस खास मौके पर एक साड़ी और एक हार पहना था, जिसमें गंडभेरुंड (Gandaberunda) बना हुआ था।

gandaberunda

दो सिरों वाला गंडभेरुंड कर्नाटक का राजकीय प्रतीक है। अक्षता मूर्ति के माता-पिता, नारायण मूर्ति और सुधा मूर्ति, कर्नाटक में निवास करते हैं। अक्षता मूर्ति के पहने गए हार पर विवाद उठा है, और लोगों में यह जानने की उत्कृष्टता है कि इसमें क्या विशेषता है और इसका क्या अर्थ है। Buy Now From Amazon

Gandaberunda के बारे में 10 खास बातें

यह कोई साधारण प्रतीक नहीं है बल्किइसे स्वयं भगवान विष्णु का रूप माना जाता है, पौराणिक कथाओं में दो सिर वाले पक्षी गंडाबेरुंडा या भेरुंडा का जिक्र आता है और इसे भगवान विष्णु का एक रूप माना जाता है।

भारतीय सांस्कृतिक धरोहर में सबसे रोचक और प्रभावशाली प्रतीकों में से एक है “Gandaberunda”. यह कर्नाटक राज्य का राजकीय प्रतीक है और इसमें एक अनोखी संबंधितता है जो इसे अद्वितीय बनाती है।

इसका मैसूर से गहरा ऐतिहासिक संबंध है। हिंदू पौराणिक कथाओं में गंडभेरुंड का जिक्र विजयनगर साम्राज्य से मिलता है, जो बाद में मैसूर साम्राज्य का प्रतीक बना। इस दो-सिर वाले पक्षी ने अब 500 साल से अधिक समय से मैसूर के शाही इतिहास को प्रतीत किया है।

इतिहासकार पीवी नंजराजे उर्स के मुताबिक, गंडभेरुंड का उपयोग पहली बार विजयनगर के टकसालों में सिक्कों पर एक संकेत के रूप में किया गया था, और इन सिक्कों में से कई आज भी मौजूद हैं। गंडभेरुंड की ताकत को दिखाने के लिए कभी-कभी पंजे और चोंचों पर हाथियों को ले जाते हुए भी इसे भगवान शिव और भगवान विष्णु की शक्ति के मिलन का प्रतीक माना गया है।

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गंडभेरुंड क्या है – What is Gandaberunda ?

पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब भगवान विष्णु ने अपने भक्त प्रह्लाद के पिता हिरण्यकश्यप को मारने के लिए नरसिम्हा (मानव-शेर) अवतार लिया, तो हिरण्यकश्यप की मृत्यु के बाद भी उनका क्रोध कम नहीं हुआ। इससे सभी देवता भयभीत हो गए और उन्होंने भगवान शिव से हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया।

इसके बाद भगवान शिव नरसिम्ह को शांत करने के लिए शरबा (हाथी के सिर वाला शेर) के रूप में आए, लेकिन जल्द ही उन्होंने खुद अपना आपा खो दिया। इस संदर्भ में भगवान विष्णु ने बड़े पंखों और विपरीत दिशा में दो सिर वाले पक्षी गंडभेरुंड का रूप लिया, जिसने शरबा को वश में करने के लिए उसे अपनी चोंच में दबा लिया।

इस दो-सिर वाले पक्षी को अपार जादुई शक्ति से युक्त माना जाता है, और इसकी मूर्तियाँ देश भर के कई मंदिरों में देखी जा सकती हैं। आजकल, गंडभेरुंड को कर्नाटक सरकार का आधिकारिक प्रतीक माना जाता है, और राज्य के सदनों के विधायक सत्रों में गंडभेरुंड वाले गोल्ड-कोटेड बैज पहनते हैं। यह भी भारतीय सेना की 61वीं घुड़सवार सेना का प्रतीक चिन्ह है।

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