Chhath Puja 2023 छठ पूजा की पौराणिक कथा, श्री राम और द्रौपदी ने रखा था व्रत

भारत भूमि त्योहारों की भूमि मानी जाती है हर त्यौहार को बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है ऐसे में आज हम हजारों सालों से चल रहे छठ पूजा व्रत से जुड़ी कुछ पौराणिक कथा जानेंगे

महाभारत काल में जब पांडव अपने राजपाट को जुए में हार गए, तब द्रौपदी ने छठ का व्रत रखा था। द्रौपदी के छठ के व्रत से पांडवों को उनका राजपाट वापस प्राप्त हुआ। इस प्रकार, छठ का व्रत आचरण करने से लोगों को धन, समृद्धि, और सुख मिलता है। छठ प्रमुखतः बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश, और कई अन्य क्षेत्रों में महत्वपूर्ण है।

द्रौपदी ने रखा था छठ का व्रत

भगवान श्री राम को मर्यादा पुरुषोत्तम का गया है, इसी में एक कथामिलती है, जब लंका विजय के बाद राम राज्य की स्थापना के दिन कार्तिक शुक्ल षष्ठी को भगवान राम और माता सीता ने उपवास किया और सूर्यदेव की आराधना की। सप्तमी को सूर्योदय के समय पुनः अनुष्ठान कर सूर्यदेव से आशीर्वाद प्राप्त किया था।

श्री राम और जानकी जी ने किया था व्रत

एक अन्य मान्यता के अनुसार छठ पर्व की शुरुआत महाभारत काल में हुई थी। सबसे पहले सूर्य पुत्र कर्ण ने सूर्य देव की पूजा शुरू की। कर्ण भगवान सूर्य का परम भक्त था। वह प्रतिदिन घंटों कमर तक पानी में खड़े होकर सूर्य को अर्घ्य देता था। सूर्य की कृपा से ही वह महान योद्धा बना था। आज भी छठ में अर्घ्य दान की यही पद्धति प्रचलित है।

सूर्यपुत्र कर्ण ने की थी छठ पूजा

भारत के कई बड़े शहरों में छठ की पूजा धूमधाम से मनाई जाती हैकई पीढियां से इस त्यौहार को मनाया जा रहा है इसके करने से कई अनेक अनेक फायदे मिलते हैं

इस पर्व को स्त्री और पुरुष समान रूप से मनाते हैं। छठ पूजा चार दिवसीय उत्सव है। इसकी शुरुआत कार्तिक शुक्ल चतुर्थी को तथा समाप्ति कार्तिक शुक्ल सप्तमी को होती है। इस दौरान व्रतधारी लगातार 36 घंटे का व्रत रखते हैं। इस दौरान वे पानी भी ग्रहण नहीं करते।